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नवरात्रि के पीछे छुपे हैं वैज्ञानिक आधार, जानें कारण?

*🌺 नवरात्रि के पीछे छुपे हैं वैज्ञानिक आधार, जानें कारण? 🌺👏🏻* देवी भागवत पुराण के अनुसार पूरे वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं जिनमें दो गुप्त नवरात्रि सहित शारदीय नवरात्रि और बासंती नवरात्रि जिसे चैत्र नवरात्रि कहते हैं शामिल हैं।  दरअसल ये चारों नवरात्रि ऋतु चक्र पर आधारित हैं और सभी ऋतुओं के संधिकाल में मनाई जाती हैं। शारदीय नवरात्रि वैभव और भोग प्रदान करने वाली है। गुप्त नवरात्रि तंत्र सिद्धि के लिए विशेष है जबकि चैत्र नवरात्रि आत्मशुद्धि और मुक्ति के लिए।  वैसे सभी नवरात्रि का आध्यात्मिक दृष्टि से अपना महत्व है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के संयोग का भी समय होता है। प्रकृति मातृशक्ति है इसलिए इस दौरान देवी की पूजा होती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय है और वह सिर्फ पुरुष हैं। यानी हम जिसे पुरुष रूप में देखते हैं वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति यानी स्त्री रूप है।  स्त्री से यहां मतलब यह है कि जो पाने की इच्छा रखने वाला है वह स्त्री है और जो इच्छा की पूर्ति करता है वह पुरुष है। ज्योतिष की दृष्टि से श...

बसन्त पंचमी 29 जनवरी विशेष

बसन्त पंचमी 29 जनवरी विशेष 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ बसंत पंचमी की तिथि पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व महत्व 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में एक बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसमे हमारी परम्परा, भौगौलिक परिवर्तन , सामाजिक कार्य तथा आध्यात्मिक पक्ष सभी का सम्मिश्रण है, हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है वास्तव में भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छः ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में बसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है और बसंत पंचमी के दिन को बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है इसलिए बसंत पंचमी ऋतू परिवर्तन का दिन भी है जिस दिन से प्राकृतिक सौन्दर्य निखारना शुरू हो जाता है पेड़ों पर नयी पत्तिया कोपले और कालिया खिलना शुरू हो जाती हैं पूरी प्रकृति एक नवीन ऊर्जा से भर उठती है। बसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है यह माता सरस्वती का प्राकट्योत्सव है इसलिए इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा उपासना कर उनसे विद्य...

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लगन अनुसार ग्रह फल

*ज्योतिष में लग्न बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। लग्न का स्वामी होकर यदि कोई ग्रह अच्छे भाव में जाता है तो जातक को उसका अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है। इसलिए यदि लग्न का स्वामी दसवें भाव में हो तब जातक अपने माता-पिता से भी अधिक धनी होता है। यह धन वह अपनी मेहनत से अर्जित करता है।* *मेष या कर्क राशि में स्थित बुध व्यक्ति को धनवान बनाता है। जब गुरु नवें या ग्यारहवें और सूर्य पांचवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति धनवान होता है। बुध, गुरु और सूर्य की यह स्तिथि एक तरह का राजयोग बनाती हैं। इस योग के साथ यदि किसी ज्योतिषाचार्य की सलाह ली जाए तो यह योग बहुत लाभकारी सिद्ध होते हैं।* जब दूसरे और नवम भाव के स्वामी एक दूसरे के घर में बैठे होते हैं तब व्यक्ति को धनवान बना देते हैं। इस अवस्था में शनि ग्रह को छोड़कर दूसरे ग्रहों को देखा जाता है। शनि देव यदि दूसरे या नवम के स्वामी हों तो यह योग धनकारी नहीं होता है। *चंद्रमा और गुरु का संयोग कुंडली में बहुत शुभ और लाभदायक माना गया है। इन दोनों ग्रहों की युती हमेशा धन और सम्मान दिलाती हैं। इसके अलावा जब चंद्रमा और गुरु या चंद्रमा और शुक्र पांचवे भाव में बैठ जाएँ...

रूद्र अभिषेक

रुद्राभिषेक करने की तिथियां कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, चतुर्थी, पंचमी, अष्टमी, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या, शुक्लपक्ष की द्वितीया, पंचमी, षष्ठी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी तिथियों में अभिषेक करने से सुख-समृद्धि संतान प्राप्ति एवं ऐश्वर्य प्राप्त होता है। कालसर्प योग, गृहकलेश, व्यापार में नुकसान, शिक्षा में रुकावट सभी कार्यो की बाधाओं को दूर करने के लिए रुद्राभिषेक आपके अभीष्ट सिद्धि के लिए फलदायक है। किसी कामना से किए जाने वाले रुद्राभिषेक में शिव-वास का विचार करने पर अनुष्ठान अवश्य सफल होता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है। प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया व नवमी के दिन भगवान शिव माता गौरी के साथ होते हैं, इस तिथि में रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि उपलब्ध होती है। कृष्णपक्ष की चतुर्थी, एकादशी तथा शुक्लपक्ष की पंचमी व द्वादशी तिथियों में भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर होते हैं और उनकी अनुकंपा से परिवार में आनंद-मंगल होता है। कृष्णपक्ष की पंचमी, द्वादशी तथा शुक्लपक्ष की षष्ठी व त्रयोदशी तिथियों में महादेव नंदी पर सवार होकर संपूर्ण विश्व में भ्रमण कर...

घर के मेन गेट की दिशा के अनुसार रखें उसका रंग, मिलेंगे शुभता

आप मानें या मानें, ये सच तो नहीं बदला जा सकता कि वास्तुशास्त्र आपके जीवन की बहुत सी परेशानियों को सुलझा सकता है। यूं तो ज्योतिष की हर विधा अपने आप में खास है और आपके जीवन को सु...

सोमवार को क्‍यों की जाती है शिव पूजा...

सोमवार को क्‍यों की जाती है शिव पूजा...            ************ सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा काफी समय पुरानी है। पुरातन काल से ही लोग इस दिन शिव की पूजा करते आए हैं।आज हम आपक...