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मोनी अमावस्या/moni amawasya by Shweeta Oberoi

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https://youtu.be/d9XNrb3jSvE कल सोमवार को मोनी अमावस्या पर करे ये उपाय और पाए सुख समृद्धि और लाभ साढ़ेसाती ढैया के लिए करे सिर्फ एक उपाय जाने के लिए देखे पूरी वीडियो ज्योतिषी परामर्श के लिए संपर्क करें आचार्य श्वेता ओबेरॉय दीदी 8527754150

गज केसरी योग कैसे बनता है, कब बनता है, क्यों फलित नही होता, कब फलित होता है जाने ज्योतिष आचार्य श्वेता ओबेरॉय से/Gaj Kesri Yog Explain by Astrologer Shweeta Oberoi

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गज केसरी योग आम तौर पर सब की कुंडली में होता है,पर शनि,राहु,केतु की बीच में आने से फलित नही होते , गुरु और चंद्र के केंद्र और त्रिकोण में आने से गज केसरी योग बनता है,गुरु और चंद्र दोनो समान अंशो पर होना जरूरी है गुरु एक भारी ग्रह है जहा गुरु बैठ जाते है ये उस भाव के प्रभाव को कम और जहा दृष्टि डालते है वहा से प्रभाव ज्यादा देते है वही चंद्र पर जिस ग्रह की दृष्टि पड़ती है ये वैसा प्रभाव देते है,गुरु चंद्र की राशि में उच्च के होते है,जिसके कारण जब ये युति, प्रीति युति,दृष्टि संबंध बनते है, तब ये योग फलित होता है, इस योग में धन लाभ,मान सम्मान,उच्च स्तरीय नोकरी,सरकार से लाभ,राजनीति में प्रवेश,और राजनीति से लाभ मिलता है जातक को अपने कारोबार से बड़ा लाभ मिलता है। कब गज केसरी योग फलित नही होता? गज केसरी योग तब फलित नही होता जब गुरु और चंद्र के अंशो में अधिक दूरी हो,चंद्र पर राहु,केतु,शादी की दृष्टि हो,गुरु और चंद्र के अंशो में कमजोरी हो तब ये योग फलित नही होता या पूर्ण लाभ नहीं देता। ऐसे में अच्छे अवसर हाथ से निकल जाते है,जातक स्वयं अपनी गलतियों के कारण बड़े अवसरों को छोड़ता जाता ह...

Worldwide Online Professional Astrologer Shweeta Oberoi

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राहु के प्रभाव,राहु की दशा,राहु की अन्य ग्रहों से युति एवं दृष्टि संबंध  जब भी किसी जातक की राहू की दशा चलती है राहू जिस भाव में होता है जिस ग्रह से युति करता है,जिस ग्रह से दृष्टि संबंध बनता है उन उन भाव और ग्रहों को प्रभावित करता है,राहू लालच का कारक है,जो है उसमे संतुष्ट नहीं होने देता,अधिकता की तरफ आकर्षित कर के गलत कार्य करवा देता है,जिसने इसमें लोक लाज,संस्कार अपनी इज्जत सब दाव पर लगा देता है। राहू के प्रभाव से वह हर वो गलत कार्य कर जाता है जो आम इंसान करने की सोचता भी नही है,राहू जिस ग्रह से युति करता है उसकी शुभता को प्रभावित करता है,अगर ग्रह राहु से अंशो में मजबूत है तो राहु का प्रभाव कम हो जाएगा ,अगर ग्रह कमजोर है तो राहु उसको अपने काबू में कर के अनैतिक कार्य की तरफ ले जाएगा। ज्योतिष आचार्य श्वेता ओबेरॉय सभी प्रकार की समस्याओं के लिए  संपर्क सूत्र 8527754150 ऐसे में जब भी किसी जातक की राहू की दशा आए उसको चाहिए वह सावधान हो जाए और किसी भी कार्य को करने से पहले किसी बुजुर्ग की सलाह जरूर लें,किसी भी कार्य में जब अधिकता का आकर्षण नजर आए तो पहले उसको परखे,फिर ...

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बुध का गोचर,राहु से युति,कैसा रहेगा प्रभाव जाइए श्वेता ओबेरॉय दीदी से

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1 मई 2021 उदय हो रहे हैं वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं यहां पहले से वृषभ राशि में राहु विराजमान हैं बुध के साथ राहु की युति कैसा प्रभाव लाएगी आपकी राशि अनुसार जानिए श्वेता ओबेरॉय दीदी से बुध बुद्धि के कारक हैं जुबान के कारक हैं हम जो भी सोचते हैं जो हम चीजों को बिना समझे जानते हैं जो बिना सोचे समझे हम बोलते हैं उन सब चीजों का कारक बुध है, राहु ब्रह्म का कारक है राहु एक बनावट है जो सुंदर लगती हैं लेकिन उसकी आंतरिक खूबसूरती कितनी है यह जानने के लिए आपको राहु को अच्छे से समझना होगा राहु सिर्फ दिखावा है राहु वह लालच है जो कभी पूरा नहीं होता राहु आपकी वह इच्छाएं हैं जिसकी जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी हम उन्हें ढोह रहे हैं राहु मायावी है राहु वह छल है जैसे आप अपनी परछाई को कभी पकड़ नहीं सकते उसका हो ना उतना ही सच है जितना कि आप यह कहे कि अगर रोशनी में आप हैं तो परछाई साथ में हैं अंधेरे में हैं तो आपकी परछाई भी आपका साथ छोड़ देती है राहु उसी भ्रम की तरह है उसी झूठ की तरह है जो है लेकिन आप भी भीतर यह जानते हैं कि वह नहीं है। राहु एक माया है जो रूप बदलकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करता है जैसे कुछ ...

नवरात्रि के पीछे छुपे हैं वैज्ञानिक आधार, जानें कारण?

*🌺 नवरात्रि के पीछे छुपे हैं वैज्ञानिक आधार, जानें कारण? 🌺👏🏻* देवी भागवत पुराण के अनुसार पूरे वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं जिनमें दो गुप्त नवरात्रि सहित शारदीय नवरात्रि और बासंती नवरात्रि जिसे चैत्र नवरात्रि कहते हैं शामिल हैं।  दरअसल ये चारों नवरात्रि ऋतु चक्र पर आधारित हैं और सभी ऋतुओं के संधिकाल में मनाई जाती हैं। शारदीय नवरात्रि वैभव और भोग प्रदान करने वाली है। गुप्त नवरात्रि तंत्र सिद्धि के लिए विशेष है जबकि चैत्र नवरात्रि आत्मशुद्धि और मुक्ति के लिए।  वैसे सभी नवरात्रि का आध्यात्मिक दृष्टि से अपना महत्व है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो यह प्रकृति और पुरुष के संयोग का भी समय होता है। प्रकृति मातृशक्ति है इसलिए इस दौरान देवी की पूजा होती है। गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि संपूर्ण सृष्टि प्रकृतिमय है और वह सिर्फ पुरुष हैं। यानी हम जिसे पुरुष रूप में देखते हैं वह भी आध्यात्मिक दृष्टि से प्रकृति यानी स्त्री रूप है।  स्त्री से यहां मतलब यह है कि जो पाने की इच्छा रखने वाला है वह स्त्री है और जो इच्छा की पूर्ति करता है वह पुरुष है। ज्योतिष की दृष्टि से श...