इंद्र जाल

इंद्रजाल एक वनस्पति है जो समुद्रों में शैवालों मूंगे की चट्टानों और समुद्र की तलहटी में बेहद गहराई में पायी जाती है।

"ये डेढ़ दर्जन से अधिक रंगों में पायी जाती है और दुनिया भर के समुद्रों में इसकी 500 से अधिक् प्रजातियां अभी तक ज्ञात हैं। "

इसका आकार शिराओं की भांति लहरदार लकीरों के रूप में होता है।  प्रजाति के अनुरूप
कुछ में शिराओं के मध्य समस्त स्थान खाली रहता है तो कुछ की शिराओं में रोयेंदार भराव भी होता है।

इसे रखने का सबसे अच्छा तरीका है इसे फ्रेम करवाकर रखना जिससे ये सुरक्षित भी रहता है और प्रभाव में कोई कमी नहीं आती।

ये लक्ष्मी और भौतिक सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। भारत में जहां इसे तंत्र से जोड़कर देखते हैं वहीँ पश्चिम में ये मात्र सजावट की वस्तु है पर बेहद महंगी।
मिस्र में इसे सुख समृद्धि और उन्नति का प्रतिक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार-

सिद्ध इंद्रजाल को अपने पास रखने से नजरदोष, ऊपरी बाधा, नकारात्मक शक्तियों और जादू टोने का प्रभाव  आदि का प्रभाव क्षीण होता है।

यह प्रबल आकर्षण शक्ति संपन्न है।

अभिमन्त्रित कर ताबीज़ में भर कर धारण करने से सर्वजन पर वशीकरण प्रभाव होता है।

रवि पुष्य नक्षत्र, नवरात्र, होली दीपावली इत्यादि शुभ समय में मंत्रों से इंद्रजाल वनस्पति को मंत्रों से अभिमंत्रित कर साधक अपने कर्मक्षेत्र में और अध्यात्मिक क्षेत्र में लाभ प्राप्त कर सकता है।

घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों भूत प्रेत आदि का प्रवेश नहीं होता । वास्तु दोषों का नाश होता है।

रोगी व्यक्ति के दक्षिण दिशा में लगाने से मृत्यु भय नहीं होता और उत्तर में लगाने से स्वास्थ्य लाभ होता है।

दुकान व्यापार स्थल के दक्षिण दिशा में लगाने से व्यापार में उन्नति होती है और दुश्मनों प्रतिद्वंदियों द्वारा किये कराये के असर से बचाव होता है।

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