लिंगाष्टकम् स्तोत्र: महत्ता, दुख निवारण और मानसिक शांति का अचूक मार्ग लेखक: एस्ट्रोलॉजर श्वेता ओबेरॉय
लिंगाष्टकम् स्तोत्र
🔱 जब मन थक जाए, तब महादेव का स्मरण करें
जीवन की आपाधापी, मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर में जब हर रास्ता बंद नजर आने लगता है, तब ईश्वर की शरण मनुष्य को संबल और सही दिशा प्रदान करती है।
एक ज्योतिषी और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में Astrologer Shweeta Oberoi के वर्षों के अध्ययन और अनुभव में प्राचीन स्तोत्रों का विशेष आध्यात्मिक महत्व रहा है।
इसी आध्यात्मिक भाव से प्रस्तुत है भगवान शिव के पावन स्वरूप की स्तुति करने वाला लिंगाष्टकम् स्तोत्र।
जहाँ श्रद्धा है, वहाँ शिव हैं।
जहाँ शिव हैं, वहाँ आशा है।
🕉️ क्या है लिंगाष्टकम् स्तोत्र?
'लिंगाष्टकम्' भगवान शिव के निराकार और कल्याणकारी 'लिंग' स्वरूप की स्तुति में रचा गया आठ श्लोकों का पावन स्तोत्र है।
इस स्तोत्र के प्रत्येक श्लोक में शिवलिंग की दिव्य महिमा का वर्णन किया गया है। यह साधक को श्रद्धा, भक्ति और आत्मिक समर्पण की ओर ले जाने वाला एक सुंदर आध्यात्मिक माध्यम माना जाता है।
🌺 लिंगाष्टकम् — आठ पावन श्लोक
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥१॥
ब्रह्मा, भगवान विष्णु और सभी देवता जिस शिवलिंग की पूजा करते हैं, जो अत्यंत निर्मल और दिव्य है तथा जन्म-जन्मांतर के दुखों का नाश करने वाला माना गया है, उस सदाशिव लिंग को मैं प्रणाम करता/करती हूँ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥२॥
देवताओं और श्रेष्ठ ऋषियों द्वारा पूजित, कामदेव को भस्म करने वाले, करुणामय तथा रावण के अहंकार का विनाश करने वाले सदाशिव लिंग को प्रणाम।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥३॥
सुगंधित द्रव्यों से सुशोभित, बुद्धि और ज्ञान को बढ़ाने वाला तथा सिद्ध पुरुषों, देवताओं और असुरों द्वारा वंदित सदाशिव लिंग को प्रणाम।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥४॥
सोने और श्रेष्ठ मणियों से अलंकृत तथा नागराज से सुशोभित उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥५॥
कुंकुम और चंदन से सुशोभित तथा कमलों की मालाओं से अलंकृत उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥६॥
जिसकी पूजा देवगण सच्चे भाव और भक्ति से करते हैं और जो करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी माना गया है, उस सदाशिव लिंग को प्रणाम।
अष्टदरिद्रविनाशनलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥७॥
आठ पंखुड़ियों वाले कमल पर विराजमान, संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति का मूल कारण और आठ प्रकार की दरिद्रता व दुखों का नाश करने वाला सदाशिव लिंग।
परात्परं परमत्मकलिङ्गं तत्प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥८॥
देवताओं के गुरु और श्रेष्ठ देवों द्वारा पूजित तथा दिव्य पुष्पों से अलंकृत उस परमात्म स्वरूप सदाशिव लिंग को प्रणाम।
🌸 फलश्रुति
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
जो व्यक्ति शिवलिंग के समीप श्रद्धापूर्वक इस पवित्र लिंगाष्टकम् का पाठ करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और भगवान शिव के साथ आनंद प्राप्त करता है।
🌿 लिंगाष्टकम् को साधना के रूप में अपनाने की विधि
यदि संस्कृत का शुद्ध उच्चारण संभव हो तो पाठ करें। अन्यथा शांत मन से लिंगाष्टकम् का श्रवण किया जा सकता है।
प्रातःकाल स्नान के पश्चात श्रद्धा से शिवलिंग पर जल, दूध या बेलपत्र अर्पित करते हुए लिंगाष्टकम् का स्मरण करें।
साधना में सबसे महत्वपूर्ण है आपका भाव, श्रद्धा और मन की एकाग्रता।
ॐ नमः शिवाय
🎧 लिंगाष्टकम् स्तोत्र सुनें
भगवान शिव की पावन उपासना और लिंगाष्टकम् स्तोत्र के इस वीडियो को इसी पेज पर सुनें।
Comments
Post a Comment