नवरात्रि 2026: हाथी की सवारी, 10 दिन का महासंयोग और खेतरी बोने का अचूक शास्त्रसम्मत नियम"

शारदीय नवरात्रि 2026 | Astrologer Shweeta Oberoi
ॐ श्री दुर्गायै नमः • शारदीय नवरात्रि 2026 • Astrologer Shweeta Oberoi
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शारदीय नवरात्रि 2026 - एस्ट्रोलॉजर श्वेता ओबराय
10 OCTOBER 2026 • SHARDIYA NAVRATRI

शारदीय नवरात्रि 2026: हाथी पर आ रही हैं मां दुर्गा!

जानिए घटस्थापना का सटीक मुहूर्त और 10 दिनों की पूजा का शास्त्रसम्मत रहस्य

शारदीय नवरात्रि 2026: हाथी पर आ रही हैं मां दुर्गा! जानिए घटस्थापना का सटीक मुहूर्त और 10 दिनों की पूजा का शास्त्रसम्मत रहस्य : एस्ट्रोलॉजर श्वेता ओबराय

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10 अक्टूबर 2026 से मां जगदम्बा की भक्ति का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू होने जा रहा है। सबसे खास और आनंद की बात तो यह है कि शास्त्रों और पंचांग की गणना के अनुसार इस बार नवरात्रि 9 नहीं, बल्कि पूरे 10 दिनों की है! यानी मां दुर्गा का आशीर्वाद और उनकी दिव्य उपस्थिति का सुख हमें पूरे 10 दिनों तक महसूस करने को मिलेगा।

आप सभी को मेरी यानी एस्ट्रोलॉजर श्वेता ओबराय की तरफ से नवरात्रि की बहुत-बहुत शुभकामनाएं! मां आपके जीवन को खुशियों, सुख-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य से भर दें।

हाथी पर आ रही हैं मां भगवती: शास्त्रों का शुभ संकेत

ज्योतिष और देवी पुराण के अनुसार, जब भी नवरात्रि की शुरुआत शनिवार के दिन होती है, तो मां दुर्गा का वाहन हाथी (गज) होता है— “शनौ च सूर्यवारे च गजारूढ़ा भगवती”।

शास्त्रों में हाथी की सवारी को परम कल्याणकारी, धन-धान्य, समृद्धि, शांति और पारिवारिक जीवन में स्थिरता लाने वाला माना गया है।

शास्त्रसम्मत विशेष उपाय:
मां के इस मंगलकारी रूप का पूर्ण आशीर्वाद पाने के लिए अपने पूजा घर में हाथी की एक छोटी सी मूर्ति (पीतल, चांदी या मिट्टी की) अथवा शास्त्रों के अनुसार शुभ मानी जाने वाली फोटो/तस्वीर जरूर रखें।

घटस्थापना का सही समय (10 अक्टूबर 2026)

शास्त्रों में विधान है कि घटस्थापना हमेशा प्रतिपदा तिथि और शुभ मुहूर्त में ही की जानी चाहिए। इस बार के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • प्रातःकाल का मुख्य मुहूर्त: सुबह 06:19 से 10:12 बजे तक।
  • अभिजीत मुहूर्त (सर्वोत्तम विकल्प): दोपहर 11:44 से 12:31 बजे तक।
  • प्रतिपदा तिथि का अंत: रात 09:20 बजे तक।

एक जरूरी बात: अगर किसी कारणवश आप सुबह 10:12 तक घटस्थापना न कर पाएं, तो शास्त्रों में वर्णित अभिजीत मुहूर्त (11:44 से 12:31) में घटस्थापना कर सकते हैं। यह मुहूर्त सर्वकार्य सिद्धिदायक माना जाता है। प्रतिपदा तिथि रात 9:20 तक है, लेकिन धर्मशास्त्रों के अनुसार घटस्थापना हमेशा सूर्यास्त से पहले ही संपन्न कर लेनी चाहिए।

लहलहाती खेतरी (जौ) बोने की वैदिक व प्राकृतिक विधि

शास्त्रों में खेतरी (जौ) को 'सृष्टि की पहली फसल' यानी 'ब्रह्मा जी का स्वरूप' माना गया है। खेतरी का हरा-भरा और घना उगना घर में आने वाली सुख-समृद्धि का प्रतीक होता है। यदि आपकी खेतरी अच्छे से प्रफुल्लित नहीं होती, तो प्राचीन ग्रंथों व पारंपरिक विधियों में बताए गए इस गुप्त सीक्रेट को अपनाएं:

  1. मिट्टी का शोधन: घटस्थापना से एक दिन पहले ही मिट्टी लाएं। शास्त्रों के अनुसार मिट्टी के शुद्धिकरण के लिए उसमें थोड़ा सा पानी और कच्चा दूध मिलाकर हल्का भिगो दें।
  2. जौ को भिगोना: बोने से 3-4 घंटे पहले जौ को साफ जल में भिगोकर रखें।
  3. रोपण विधि: मिट्टी के पात्र में जौ को समान रूप से बोएं, विशेषकर पात्र के किनारों पर भी अच्छे से दबाएं।
  4. आक के पत्तों से ढंकना: जौ बोने के बाद उस पात्र को 2 दिनों के लिए आक (मदार) के पत्तों से ढककर रखें।
  5. 2 दिन बाद परिणाम: दो दिन बाद जब आप पत्ते हटाएंगे, तो पाएंगे कि आपकी खेतरी बहुत ही सुंदर, घनी और खिली-खिली अंकुरित हो चुकी होगी।

शास्त्रसम्मत कलश स्थापना व दिव्य कलश निर्माण

  • स्थान का लेपन: पूजा स्थल (ईशान कोण) को साफ करके गोबर या गंगाजल से लीपकर पवित्र करें।
  • पात्र का चयन: शास्त्रों के अनुसार पूजा-पाठ में मिट्टी या पीतल के बर्तनों का ही विधान है। स्टील या लोहे के पात्रों का प्रयोग वर्जित माना गया है।
  • कलश में डालें ये 5 शुभ चीजें:
    1. लौंग
    2. इलायची
    3. कपूर
    4. ₹2 या ₹5 का सिक्का (धातु)
    5. केसर

यह शास्त्रसम्मत विधि जल को पूरी तरह सकारात्मक ऊर्जा और हीलिंग तरंगों से भर देती है। पूरे 10 दिनों तक कलश का जल दिव्य शक्ति से अभिमंत्रित हो जाता है। नवरात्रि के बाद इस पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

नारियल स्थापना: कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर लाल वस्त्र या चुनरी में लपेटा हुआ नारियल स्थापित करें।

शास्त्रों के अनुसार 10 दिनों का यह पावन पर्व हम सभी के लिए मां की असीम कृपा और मंगल लेकर आ रहा है। मां दुर्गा आपके घर में सुख, समृद्धि और शांति का वास करें।

जय माता दी! 🙏

एस्ट्रोलॉजर श्वेता ओबराय

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